सभी का सपना होता ही उनका प्यारा सा खुद का एक घर हो।लेकिन आसमान छूती महँगाई ने लोगो के इस सपने को साकार होने से रोक रखा था। घर बनाने में इस्तेमाल होने वाले सरिये के भाव ने सबका बजट बिगाड़ के रख दिया था।लेकिन सरकार के सकारात्मक प्रयासों की वजह से सरिये तथा अन्य कंस्ट्रक्शन सामग्री की किमतो में भारी गिरावट देखने को मिली है।

किन कारणों से हुई है सरिये की कीमतें इतनी कम

सरिये की कीमतों में भारी गिरावट होने के मुख्य रूप से दो कारण हैं।

1. सरकार ने स्टील पर निर्यात शुल्क बढा दिया

केंद्र सरकार ने हाल ही में स्टील पर निर्यात यानी export duty को बढ़ा दिया हैं जिसके कारण घरेलू बाजार में सरिये की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिली हैं। आपको बता दे कि मार्च में सरिये का खुदरा भाव 85 हजार प्रति टन पर पहुँच गया था जोकि हाल ही में 45-50 हजार रुपये प्रति टन पर आ गिरा हैं। सरिये की कीमतों में लगातार गिरावट अभी भी जारी है।

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पिछले कुछ महीनों में कितनी कम हुई सरिये की कीमतें – इस चार्ट से समझिये।

नवंबर 2021 : 70000
दिसंबर 2021 : 75000
जनवरी 2022 : 78000
फरवरी 2022 : 82000
मार्च 2022 : 83000
अप्रैल 2022 : 78000
मई 2022 (शुरुआत) : 71000
मई 2022 (अंतिम सप्ताह): 62-63000
जून 2022 (शुरुआत): 48-50000

जानिए देश के प्रमुख शहरों में क्या है सरिये की कीमतें। (नोट – यह रेट 04 जून 2022 को अपडेट हुआ है. आयरनमार्ट (Ironmart) वेबसाइट सरिये की कीमतों के उतार -चढ़ाव पर नजर रखती है और साप्ताहिक आधार पर कीमतों को अपडेट करती है.
(कीमतें रुपये प्रति टन में हैं.)

दिल्ली: 55,000
मुंबई (महाराष्ट्र): 55,200
जयपुर (राजस्थान): 52,200
दुर्गापुर (पश्चिम बंगाल): 45,300
कोलकाता (पश्चिम बंगाल): 45,800
रायगढ़ (छत्तीसगढ़): 48,700
राउरकेला (ओडिशा): 50,000
नागपुर (महाराष्ट्र): 51,000
हैदराबाद (तेलंगाना): 52,000
भावनगर (गुजरात): 52,700
मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश): 52,900
गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश): 53,000
इंदौर (मध्य प्रदेश): 53,500
गोवा: 53,800
जालना (महाराष्ट्र): 54,000
मंडी गोविंदगढ़ (पंजाब): 54,300
चेन्नई (तमिलनाडु): 55,000
कानपुर (उत्तर प्रदेश): 57,000

2. भारतीय बाजार में सरिये के डिमांड में कमी

जैसा कि आप सब जानते हैं कि अब मानसून भारत मे दस्तक दे चुका है।भारत के कई इलाकों में बारिश होने लगी हैं ।बारिश के मौसम में सभी प्रकार के निर्माण कार्य कम हो जाते हैं। इसी कारण निर्माण कार्य मे प्रयोग होने वाली चीजों की खपत भी कम हो जाती है। या हम कह सकते हैं कि डिमांड में भारी गिरावट देखने को मिलती हैं।डिमांड कम होने के कारण भी सरिये के भाव कुछ हद तक कम हुए हैं।